क्या आपको पता है कर्ण ने ही किया था कर्ण का वध | मारा | मृत्यु | डेथ

कर्ण ने ही किया था कर्ण का वध

कर्ण ने ही किया था कर्ण का वध नमस्कार दोस्तों आप महाभारत के महान योद्धा कर्ण के बारे में तो जानते ही होंगे और यह भी जानते होंगे कि कर्ण के पिता भगवान सूर्य थे और उनकी माता वही देवी कुंती थी जो युधिष्ठिर भीम तथा अर्जुन की भी माता थी परंतु कालचक्र ने महाभारत के युद्ध के समय करण को अर्जुन के विरुद्ध युद्ध करने के लिए विवश कर दिया था

कर्ण ने ही किया था कर्ण का वध

कहते हैं कि कर्ण के विरोधी पक्ष के साथ मिल जाने से भगवान कृष्ण बड़े चिंतित हो गए थे क्योंकि वह जानते थे कि कर्ण एक बहुत बड़ा धनुर्धर और अर्जुन कभी भी उससे युद्ध में नहीं जीत पाएगा इसी कारण भगवान कृष्ण ने कर्ण के साथ बहुत छल किया था और कर्ण से उसकी सारी शक्तियां छल द्वारा छीन ली थी

कहते हैं तब जाकर अर्जुन युद्ध में कर्ण को मार पाया था परंतु यह सत्य नहीं है दोस्तों क्योंकि करना अपनी सारी शक्तियों के चले जाने के बाद भी अर्जुन को उसकी पूरी सेना के साथ अकेले ही समाप्त कर देने कि क्षमता रखता था अगर ऐसा था तो आपके मन में यह प्रश्न अवश्य खड़ा हो रहा होगा की कर्ण को किसने मारा था

तो चलिए देखते हैं कि कर्ण की मृत्यु की सत्यता क्या है आप लोग शायद यह तो जानते ही होंगे कि कर्ण भगवान परशुराम के शिष्य थे उन भगवान परशुराम के शिष्य जो सिर्फ ब्राह्मण पुत्रों को ही अपना शिष्य बनाते थे भगवान परशुराम से धनुर्विद्या सीखने के लिए कर्ण भी अपने आपको ब्राह्मण  बताया था और झूठ का सहारा लेकर ही करने भगवान परशुराम सेवा सारी धनुर्विद्या सीखी थी जो विद्या अर्जुन के गुरु द्रोणाचार्य को भी नहीं आती थी

बताते हैं कि कर्ण की शिक्षा पूरी होने के बाद एक दिन भगवान परशुराम कर्ण की एक जांघ  पर अपना सिर रखकर सो रहे थे तभी एक कीड़ा आकर भगवान परशुराम की जटाओं में छिप गया और कर्ण की जांघ में काटने लगा कर्ण को  कीड़े के काटने से बड़ा ही असहनीय दर्द हो रहा था परंतु वह कीड़ा कर्ण को दिखाई नहीं पड़ रहा था

जिससे उसकी टंग से हटा सके और क्योंकि वह जानते थे कि पैर हिलाने से उनके गुरु टूट जाएगी और वह अपने गुरु के विश्राम में किसी प्रकार का भेद नहीं डालना चाहते थे परंतु उस कीड़े के काटने से कर्ण की जान से खून बहने लगा था और वह बहता हुआ खून जब भगवान परशुराम के मुंह पर लगा तो उनकी नींद टूट गई थी

दोस्तों भगवान परशुराम कर्ण की सहनशीलता को देख आश्चर्य में पड़ गए थे और बात समझ गए थे ब्रह्मपुत्र नहीं है क्योंकि कोई भी ब्राह्मण इस असहनीय पीड़ा को नहीं सह सकता था इसलिए भगवान परशुराम ने क्रोध में आकर श्राप दे दिया था कि तुम ने धोखे से जो धनुर्विद्या प्राप्त की है उसे तुम अपने युद्ध के समय अचानक भूल जाओगे और दोस्तों यही करण के साथ हुआ था

जब युद्ध के समय कर्ण के रथ का पहिया जमीन में धंस गया था तब उसे निकालने के लिए कर्ण रात से नीचे उतर आया था उसी समय कृष्ण के कहने पर जब अर्जुन ने कर्ण को युद्ध के लिए ललकारा 

कर्ण भगवान परशुराम के श्राप के कारण अपनी सारी धनुर्विद्या भूल गया था और रथ का पहिया हाथों में लेकर अर्जुन से युद्ध करने लगा था जिससे आसानी से अर्जुन के तीरों से बुरी तरह घायल होकर जमीन पर गिर पड़ा था इसलिए यह कहा जा सकता है कि कर्ण को खुद कर्ण  मारा था तो दोस्तों  कर्ण  बारे में जानकारी आपको कैसी लगी

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